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भा.नौ.पो. सातवाहन

 

भा.नौ.पो. सातवाहन

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस प्रतिष्ठान का नाम “सातवाहन” वंश से लिया गया है, जिसने प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी तट पर (184 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी तक) शासन किया था। इस वंश के प्रथम शासक श्रीमुख सातवाहन थे। सातवाहन वंश के तीसरे राजा सातकर्णी के शासनकाल में भारतीय जहाज़ों ने सुदूर पूर्व के द्वीपों—काताह (मलेशिया का कदेह), करापुरा (कपूर द्वीप), सुवर्ण (सुमात्रा) तथा इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के अन्य द्वीपों तक नौकायन किया, जहाँ उन्होंने समृद्ध उपनिवेश स्थापित किए। इस प्रतिष्ठान का शिखा-चिह्न (क्रेस्ट) प्राचीन “सातवाहन” सिक्के से प्रेरित है।

इस इकाई की स्थापना मूल रूप से एक एकीकृत प्रशिक्षण संस्थान (सर्कार II) के रूप में 11 मार्च 1974 को की गई थी, जिसका उद्देश्य सोवियत मूल के जहाज़ों और पनडुब्बियों के लिए अधिकारियों और नाविकों को प्रशिक्षण प्रदान करना था। बाद में इस प्रतिष्ठान को आईएनएस सातवाहन नाम दिया गया और 21 दिसंबर 1974 को इसे कमीशन किया गया। वर्ष 1986 में सतही प्रशिक्षण विद्यालय को बंद कर आईएनएस सातवाहन को पूर्णतः पनडुब्बी प्रशिक्षण संस्थान में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में यह भारतीय नौसेना का प्रमुख पनडुब्बी प्रशिक्षण प्रतिष्ठान है।

कमान एवं नियंत्रण

वर्ष 1999 तक इस इकाई का प्रशासनिक नियंत्रण फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न नेवल कमांड द्वारा किया जाता था, जबकि पनडुब्बी प्रशिक्षण की संपूर्ण जिम्मेदारी फ्लैग ऑफिसर सबमरीन (FOSM) के पास थी। हालांकि, चूंकि सातवाहन मुख्यतः एक प्रशिक्षण आधार है, इसलिए 1999 में कमान संरचना में परिवर्तन किया गया और प्रशिक्षण का कार्यात्मक नियंत्रण फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, साउदर्न नेवल कमांड को सौंपा गया। इकाई का प्रशासनिक नियंत्रण फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न नेवल कमांड के पास ही रहा। पनडुब्बी प्रशिक्षण के तकनीकी पहलुओं के लिए फ्लैग ऑफिसर सबमरीन, FOC-in-C साउथ को आवश्यक सहयोग प्रदान करते हैं।

पनडुब्बी प्रशिक्षण

इस अग्रणी प्रशिक्षण प्रतिष्ठान की मुख्य भूमिका पनडुब्बी शाखा के कठोर प्रदर्शन उद्देश्यों और उच्च मानकों को पूरा करने हेतु विश्व स्तरीय पनडुब्बी एवं आपातकालीन पलायन (एस्केप) प्रशिक्षण प्रदान करना है। यह नौसेना का एकमात्र एकीकृत प्रशिक्षण प्रतिष्ठान है, जहाँ पनडुब्बी शाखा के सभी अधिकारियों और नाविकों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। आईएनएस सातवाहन में प्रशिक्षण पनडुब्बी स्कूल (SMS), एस्केप ट्रेनिंग स्कूल (ETS) तथा स्कूल ऑफ एडवांस्ड अंडरसी वॉरफेयर (SAUW) द्वारा दिया जाता है। SAUW की स्थापना दिसंबर 2006 में आईएनएस सातवाहन परिसर के भीतर की गई थी, जिसका उद्देश्य परमाणु पनडुब्बियों के चालक दल को प्रशिक्षण देना है। आज SAUW अत्याधुनिक सिमुलेटरों और उन्नत प्रशिक्षण अवसंरचना के साथ एक आधुनिक प्रशिक्षण विद्यालय बन चुका है। स्कॉर्पीन श्रेणी तथा P-75 (I) श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए प्रशिक्षण व्यवस्थाएँ भी सातवाहन में विकसित की जा रही हैं। विदेशी नौसेनाओं के कर्मियों को भी यहाँ प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे यह दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे प्रतिष्ठित पनडुब्बी प्रशिक्षण संस्थान बन गया है।

कमान संबंधी जिम्मेदारियाँ

प्रशिक्षण के अतिरिक्त, इस इकाई को ईस्टर्न नेवल कमांड की विभिन्न सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इनमें भारतीय नौसेना खेल नियंत्रण प्रकोष्ठ (विशाखापट्टनम), कमांड ऑडिटोरियम ‘समुद्रिका’, कमांड स्टेडियम, 104 क्षेत्र में केवी II, डॉल्फिन हिल स्थित लिटिल एंजेल्स स्कूल तथा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला नेवी मेला शामिल हैं। इन जिम्मेदारियों में नवीनतम जोड़ ईस्टर्न नेवल कमांड पोलो एवं इक्वेस्ट्रियन ट्रेनिंग सेंटर (ENPET) है, जिसका उद्घाटन दिसंबर 2009 में आईएनएस सातवाहन में किया गया। ENPET कमांड के सभी सेवा कर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए घुड़सवारी प्रशिक्षण प्रदान करता है। इस सुविधा में सोलह घोड़े हैं और इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।

उपलब्धियाँ

इस इकाई ने अपने मुख्य प्रशिक्षण दायित्वों और सौंपे गए कमान संबंधी कार्यों का सफलतापूर्वक समन्वय किया है और दोनों क्षेत्रों में उच्चतम मानक स्थापित किए हैं।

आत्मविश्वास का टॉवर : एस्केप ट्रेनिंग टॉवर

  • साहसिक शिविर: प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत वर्ष में दो बार आयोजित किए जाने वाले साहसिक शिविर, रामबिल्ली गांव के निकट नौसेना उन्नत परिचालन आधार (NAOB) में नौसेना की उपस्थिति का प्रमुख प्रदर्शन हैं।
  • चिकित्सा शिविर: प्रशिक्षण शिविरों के अंतर्गत आयोजित चिकित्सा शिविरों से रामबिल्ली गांव के आसपास की स्थानीय जनता को अत्यधिक लाभ हुआ है। इन पहलों से ग्रामीणों में जागरूकता और सद्भावना का प्रसार हुआ है।
  • प्रशिक्षण मॉडल एवं सिमुलेटर: सातवाहन में उपलब्ध प्रशिक्षण मॉडल और सिमुलेटरों ने पनडुब्बी स्क्वाड्रनों और मरम्मत यार्डों को दोषों की पहचान और सुधार में अत्यधिक सहायता प्रदान की है, साथ ही उपकरणों में संभावित ‘एडिशन एवं अल्टरशन’ में भी योगदान दिया है।
  • डाइविंग सुविधाएँ: एस्केप ट्रेनिंग स्कूल की डाइविंग सुविधाओं का उपयोग कमांड डाइविंग टीमों के प्रशिक्षण, एयरक्रू सर्वाइवल ड्रिल्स, हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी आदि के लिए किया गया है।