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भा.नौ.पो. तुशील अपने घर पहुंचा – करवार, भारत में प्रथम आगमन

भा.नौ.पो. तुशील अपने घर पहुंचा – करवार, भारत में प्रथम आगमन
भा.नौ.पो. तुशील अपने घर पहुंचा – करवार, भारत में प्रथम आगमन
भा.नौ.पो. तुशील अपने घर पहुंचा – करवार, भारत में प्रथम आगमन
भा.नौ.पो. तुशील अपने घर पहुंचा – करवार, भारत में प्रथम आगमन

भा.नौ.पो. तुशील, दो अतिरिक्त पी.1135.6 फॉलो-ऑन जहाजों में से पहला, 14 फरवरी 2025 को अपने गृह बंदरगाह करवार में गर्व के साथ प्रवेश किया। यह ऐतिहासिक यात्रा का समापन था, जिसमें जहाज ने 12,500 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की। 18 दिसंबर 2024 को कालिनिनग्राद, रूस से रवाना होने के बाद, इसने तीन महाद्वीपों में फैले आठ देशों का दौरा किया।

यह जहाज 09 दिसंबर 2024 को रूस के कालिनिनग्राद में एक भव्य समारोह के दौरान भारतीय नौसेना में शामिल हुआ था। इस अवसर पर भारत के माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे। समारोह में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, रूसी नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल अलेक्ज़ेंडर अलेक्सेयेविच मोइसेयेव सहित दोनों देशों के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। इससे पहले, जहाज के चालक दल ने जहाज की प्रणालियों की व्यापक समझ विकसित करने के लिए गहन प्रशिक्षण लिया और विभिन्न परीक्षणों एवं हथियार प्रणाली के परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया। रूस में प्रवास के दौरान चालक दल ने सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूती मिली।

यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी तट के आसपास अपनी प्रथम यात्रा के दौरान, जहाज ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करते हुए लंदन (यूनाइटेड किंगडम), कासाब्लांका (मोरक्को), डकार (सेनेगल), लोमे (टोगो), लागोस (नाइजीरिया), वाल्विस बे (नामीबिया), डरबन (दक्षिण अफ्रीका) और विक्टोरिया (सेशेल्स) के बंदरगाहों का दौरा किया। इन पोर्ट यात्राओं के दौरान, चालक दल ने विभिन्न पेशेवर संवादों में भाग लिया और मेजबान नौसेनाओं के साथ क्षमता निर्माण एवं सहयोगी प्रयासों को बढ़ावा दिया। इसके अतिरिक्त, जहाज ने भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ भी संवाद किया, जिससे भारत के मित्र राष्ट्रों के साथ कूटनीतिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ हुए। भा.नौ.पो. तुशील ने मोरक्को, सेनेगल, नाइजीरिया, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास (एम.पी.एक्स.) किए, जिससे भारतीय नौसेना की समुद्री सहयोग एवं अंतरसंचालन क्षमता के प्रति प्रतिबद्धता उजागर हुई। इसके अलावा, जहाज ने अपने पारगमन के दौरान गिनी की खाड़ी में गश्त भी की, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूती प्रदान की गई। 

करवार पहुंचने पर जहाज का औपचारिक स्वागत किया गया। यह समारोह रियर एडमिरल अजय पटने, एडमिरल सुपरिंटेंडेंट ऑफ यार्ड (करवार) की अध्यक्षता में आयोजित हुआ, जिसमें कर्नाटक नौसेना क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और चालक दल के परिजनों ने भाग लिया। सात महीने से अधिक समय बाद चालक दल के सदस्य अपने परिवारों से मिले, जिससे वातावरण हर्षोल्लास से भर गया। जहाज के युद्धघोष – “निर्भय, अभेद्य और बलशील” और तुशील गीत की गूंज पूरे परिसर में गूंज उठी। जहाज बेड़े के साथ एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा तथा सौंपे गए दायित्वों को निभाने के लिए तैयार है।