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नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की जापान की आधिकारिक यात्रा

नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की जापान की आधिकारिक यात्रा
नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की जापान की आधिकारिक यात्रा

नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 30 जुलाई से 02 अगस्त 2025 तक चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जापान रवाना हुए हैं। यह यात्रा भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने के सतत प्रयासों का हिस्सा है, जो गहरी होती ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ के अनुरूप है, जिसमें समुद्री सहयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

यात्रा के दौरान, नौसेना प्रमुख जापान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, जिसमें रक्षा मंत्री श्री नाकातानी जेन, रक्षा उपमंत्री श्री मासुदा काज़ुओ, और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जे.एम.एस.डी.एफ.) के स्टाफ प्रमुख एडमिरल सैतो अकिरा शामिल हैं। चर्चाओं में रक्षा सहयोग के विविध क्षेत्रों, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, और नौसेना तालमेल व अंतरसंचालनीयता को मजबूत करने के लिए नए अवसरों की खोज पर बल दिया जाएगा। नौसेना प्रमुख जे.एम.एस.डी.एफ. की इकाइयों का दौरा करेंगे और फुनाकोशी जे.एम.एस.डी.एफ. बेस पर कमांडर-इन-चीफ, सेल्फ डिफेंस फ्लीट के साथ बातचीत करेंगे।

एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की जापान में मुलाकातें आपसी मित्रता और रक्षा सहयोग को और गहरा करने की दिशा में तैयार हैं, जो साझा रणनीतिक और समुद्री हितों के प्रमुख क्षेत्रों में आपसी समझ को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। यह यात्रा आपसी सम्मान, समुद्री विश्वास, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित भारत-जापान की समय-परीक्षित मित्रता को पुनः पुष्ट करती है।नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 30 जुलाई 2025 को जे.एम.एस.डी.एफ. के स्टाफ प्रमुख एडमिरल सैतो अकिरा के साथ चर्चा को आगे बढ़ाया

एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, नौसेना स्टाफ के प्रमुख ने अपनी जापान की आधिकारिक यात्रा के दौरान 30 जुलाई 2025 को मेमोरियल सेनोटैफ पर श्रद्धांजलि अर्पित की, गार्ड ऑफ ऑनर की समीक्षा की, और जे.एम.एस.डी.एफ. के स्टाफ प्रमुख एडमिरल सैतो अकिरा के साथ चर्चा को आगे बढ़ाया। चर्चाओं का केंद्र बिंदु दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग और तालमेल को मजबूत करना रहा, जिसमें परिचालनात्मक जुड़ाव को बढ़ाना, अंतरसंचालनीयता, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, सहयोगात्मक क्षमता निर्माण, और प्रशिक्षण आदान-प्रदान पहल शामिल थे।