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नौसेना प्रमुख ने समुद्री चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञानों पर 40वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया

नौसेना प्रमुख ने समुद्री चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञानों पर 40वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया
नौसेना प्रमुख ने समुद्री चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञानों पर 40वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया

नौसेना प्रमुख ने 01 नवंबर 2025 को भा.नौ.पो. सस्विनी में आयोजित समुद्री चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञानों पर 40वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया, जो इस वर्ष आई.ओ.एन.एस. मेडिकल वर्कशॉप के साथ संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

नौसेना प्रमुख ने समुद्री चिकित्सा के क्षेत्र में चार दशकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों तथा इस वर्ष के संस्करण में भाग लेने वाले 14 देशों के सहयोगी भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा तत्परता ही वास्तविक परिचालन तत्परता है और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा अंतिम नाविक तक, अंतिम नौसैनिक मील तक पहुँचना आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बुद्धिमान मशीनों के युग में भी मिशन की सफलता के केंद्र में मानव की विवेकशीलता, सहनशक्ति और संवेदना ही बनी रहती है।

नौसेना प्रमुख ने नौसेना चिकित्सा देखभाल के भविष्य को दिशा देने वाले तीन प्रमुख आयाम प्रस्तुत किए-

  1. गहन श्रवण – समुद्री क्षेत्र में मानवीय क्षमता और प्रदर्शन की सीमाओं का अन्वेषण।
  2. डेटा एवं नेटवर्क आधारित निदान – वास्तविक समय में सटीक चिकित्सा निर्णयों के लिए ए.आई., बायोमेट्रिक और कनेक्टेड प्रणालियों का उपयोग।
  3. समग्र हस्तक्षेप – उपचार के बजाय रूपांतरण की दिशा में, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का संवर्धन।

नौसेना प्रमुख ने भारतीय नौसेना की चिकित्सा शाखा की पेशेवर दक्षता, नवाचार और करुणा के उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की, जिसके माध्यम से समुद्र में टेलीमेडिसिन से लेकर ए.आई. आधारित निदान तक ने न केवल युद्धक प्लेटफॉर्मों को बल्कि उन्हें संचालित करने वाले कर्मियों को भी सशक्त बनाया है।

उनका संबोधन भारत सरकार की ‘महा-सागर’ परिकल्पना के अनुरूप था, जिसके तहत सहयोग, विश्वास और साझा प्रगति पर आधारित एक सुरक्षित, सुदृढ़ और स्वास्थ्यपूर्ण समुद्री विश्व की रचना का लक्ष्य रखा गया है।