आईएनएस ईक्षक, सर्वे वेसल लार्ज (एसवीएल) श्रेणी के तीसरे पोत के रूप में, 06 नवम्बर 2025 को नौसेना बेस, कोच्चि में आयोजित एक भव्य समारोह में भारतीय नौसेना में आयोगित किया गया। आयोगन समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी द्वारा की गई। इस अवसर पर उप नौसेना प्रमुख (दक्षिण) वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, नौसैनिक दिग्गज, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता के प्रतिनिधि तथा अन्य विशिष्ट नागरिक गण उपस्थित थे। यह ऐतिहासिक क्षण आईएनएस ईक्षक के औपचारिक समावेश का प्रतीक रहा, जो भारतीय नौसेना की हाइड्रोग्राफिक एवं समुद्री क्षमताओं को सुदृढ़ करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आगमन पर नौसेना प्रमुख को 50-सदस्यीय गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। आयोगन समारोह की शुरुआत पोत के कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन तृभुवन सिंह द्वारा आयोगन वारंट के वाचन से हुई। इसके पश्चात नौसैनिक ध्वज राष्ट्रीय गान के साथ फहराया गया और ‘कलर गार्ड’ ने सलामी प्रस्तुत की। इसी दौरान पोत का आयोगन पेनेंट भी फहराया गया, जो उसके सक्रिय नौसैनिक सेवा में समावेश का संकेत है। यह पेनेंट तब तक फहराता रहेगा जब तक पोत सेवा में बना रहेगा। आयोगन पट्टिका का अनावरण नौसेना प्रमुख द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में नौसेना प्रमुख ने आईएनएस इक्षाक को भारतीय नौसेना, भारतीय उद्योगों एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सफल सहयोग का प्रतिरूप बताया—जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करता है। अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक प्रणालियों तथा हेलीकॉप्टर संचालन क्षमता से लैस यह पोत दोहरी भूमिका निभाने में सक्षम है—सर्वे पोत के रूप में तथा आवश्यकता पड़ने पर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) संचालन या अस्पताल पोत के रूप में। विशेष रूप से, इक्षाक पहला एसवीएल पोत है जिसमें महिला सैन्यकर्मियों के लिए समर्पित आवास उपलब्ध कराया गया है, जो नौसेना की समावेशन और आधुनिकीकरण संबंधी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसके समावेश से भारत की हाइड्रोग्राफिक सर्वे क्षमता और स्वदेशी जहाज निर्माण सामर्थ्य में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आईएनएस ईक्षक अब नए समुद्री क्षेत्रों को चिह्नित करने, समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और राष्ट्रीय समुद्री हितों को सुदृढ़ करने के लिए तैयार है। नौसेना प्रमुख ने भारत की समुद्री शक्तियों और सामरिक क्षमता को आगे बढ़ाने में इस पोत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। आयोगन समारोह के उपरांत नौसेना प्रमुख ने पोत के विभिन्न विभागों का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें निर्माण प्रक्रिया तथा स्वदेशी प्रणालियों के एकीकरण के बारे में अवगत कराया गया। उन्होंने आयोगन दल और जीआरएसई के अधिकारियों से भी संवाद किया तथा भारतीय नौसेना में भा.नौ.पो.ईक्षक के सफल समावेश में उनके समर्पण, पेशेवरिता और योगदान की सराहना की।