भारत की समुद्री विरासत इस्पात युग से भी पहले की है। अजंता की भित्तिचित्रों (5वीं शताब्दी ईस्वी) से प्राप्त ऐतिहासिक साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि उस समय बिना कील के, केवल नारियल की रस्सी, रेशे और प्राकृतिक रेज़िन से सिले हुए जहाज बनाने की परंपरा प्रचलित थी।
भा.नौ.पो. कौंडिन्य आज इसी प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
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