भारतीय नौसेना अकादमी, एज़िमाला में डिल्ली श्रंखला समुद्री शक्ति सेमीनार के पाँचवें संस्करण का समापन
“समुद्री शक्ति की भूराजनैतिक प्रभाव” पर डिल्ली श्रंखला समुद्री शक्ति के पाँचवें संस्करण का समापन 12 अक्टूबर 2018 को भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए) में हुआ। सेमीनार के दौरान विभिन्न विषयों जैसे ‘स्थानों और आधारों को –कैसे हिंद महासागर में एंग्लो – फ्रेंच प्रतिद्वंद्वता ने व्यापार सुरक्षा के लिए नौसेना की रणनीति को प्रभावित किया’ , ‘द बैटल ऑफ दियू’ , ‘चीन की बेल्ट तथा सड़क की पहल’ , ‘भारत के समुद्री पड़ोस में चीन की सहभागिता का आकलन करना’ , ‘चीन की समुद्री शक्ति तथा बेल्ट एवं रोड पहल : 21वीं शताब्दी में उपनिवेशीकरण के लिए महानियान ब्लूप्रिंट’ तथा ‘गन बोट कूटनीति’ को शामिल करने वालेनौ दस्तावेजों को प्रस्तुत किया गया। हुई। दो दिवसीय आयोजन में अनेकों सेवारत और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौसेना के अधिकारी, प्रतिष्ठित शिक्षाविद तथा गणमान्य दिग्गज उपस्थित रहे।
रियर एडमिरल एसवाई श्रीखंडे, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में, सेमीनार की दूसरे दिन की कार्रवाई ‘गनबोट कूटनीति’ पर केन्द्रित रही। आईएनए के कैडेट ने ‘गनबोट कूटनीति: भारत-प्रशांत क्षेत्र में उभरते खिलाड़ी और संबद्ध चुनौतियां’, विषय पर एक दस्तावेज प्रस्तुत किया। इस दिन गनबोट राजनीति पर वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान, एवीएसएम एवं बार, वीएसएम (सेवानिवृत्त) द्वारा (14वीं -17वीं शताब्दी तक की संभावनाओं को शामिल करके), कमॉडोर जी प्रकाश 17वी शताब्दी से आगे तथा कमांडर पी रथीश द्वारा इसके हिंद महासागर क्षेत्र में प्रयोग पर सम्मोहित करने वाले और गहरी पहुँच वाला प्रस्तुतीकरण पेश किया।
आइ एन ए के डिप्टी कमांडेंट एवं चीफ इंस्ट्रक्टर रियर एडमिरल पुनीत चड्ढा, वीएसएम, डेप्युटी कमांडेंट एवं चीफ इंस्ट्रक्टर, आईएनए ने समापन भाषण दिया तथा दर्शकों को विशेष कर आईएनए के कैडेट को उच्च गुणवत्ता वाले व्याख्यानों के माध्यम से बौद्धिक अनुभव प्रदान करने के लिए सभी दस्तावेज प्रस्तुतकर्ताओं, चेयरपर्सन, एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं दिग्गजों के लिए आभार व्यक्त किया। सहायक प्रोफेसर डॉ. ललिथा शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।
भारतीय नौसेना अकादमी ने एज़िमाला में स्थित माउंट डिल्ली जोकि क्षेत्र के समुद्री इतिहास की गतिविधियों का साक्षी रहा है, के बाद वार्षिक सेमीनार को ‘डिल्ली’ श्रंखला के रूप में नामित किया। लाइटहाउस का चिह्न ‘आगे देखने के लिए पीछे देखना’ की जरूरत को प्रदर्शित करता है। सेमीनार अनुभव को समृद्ध करने वाला रहा है तथा उम्मीद है कि ‘डिल्ली’ श्रंखला युवा अधिकारियों और कैडेट को समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही साथ अतीत के मजबूत आधार को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
भारतीय नौसेना अकादमी में डिल्ली श्रंखला समुद्री शक्ति सेमीनार 2018 की शुरूआत
भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए) में 11 अक्टूबर 2018 को ‘समुद्री शक्ति का भूराजनैतिक प्रभाव’ पर वार्षिक डिल्ली सेमीनार के पॉचवें संस्करण का शुरूआत हुई। दो दिवसीय सेमीनार में अनेकों सेवारत वरिष्ठ नौसेना के अधिकारी, प्रतिष्ठित शिक्षाविद तथा गणमान्य दिग्गज भाग ले रहे हैं। आई एन ए के कमांडेंट वाइस एडमिरल आरबी पंडित, एवीएसएम, ने उद्घाटन भाषण दिया।
सेमीनार की कार्यवाही ‘हमारी विदेश तथा सामरिक नीतियों में महाद्वीपीय और समुद्री एकीकरण’ पर पूर्व राजनयिक तथा पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त रह चुके डॉ. टीसीए राघवन द्वारा डिल्ली आमंत्रण वार्तालाप से शुरू हुई।
पहले दिन का पहला सत्र ‘समुद्री शक्ति और उपनिवेशन’ के नाम रहा, जिसकी अध्यक्षता कमोडोर ओडक्कल जॉन्सन ने की तथा लेखिका डॉ. अनुपमा घोष की ‘द बैटल ऑफ दियू’ पर प्रस्तुतीकरण से शुरूआत हुई एवं वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान, एवीएसएम एवं बार, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने वास्को डा गामा के कालीकट में आगमन के बाद के दशक में नौसेना की लड़ाइयों का तथा उस समय की बड़ी भू-राजनीति में उनकी यात्राओं का विश्लेषण किया। ज़मोरिन के नेतृत्व में संयुक्त बलों की हार के कारण तथा इसका भारत के इतिहास में पड़ने वाले प्रभाव को भी शामिल किया गया था।
दूसरा दस्तावेज ‘स्थानों और आधारों को –कैसे हिंद महासागर में एंग्लो – फ्रेंच प्रतिद्वंद्वता ने व्यापार सुरक्षा के लिए नौसेना की रणनीति को प्रभावित किया’ विषय पर कमांडर योगेश वी अठावले द्वारा प्रस्तुत किया गया। अधिकारी, पनडुब्बी प्रतिरोधी जंग में विशेषज्ञ पेशेवर प्रकाशनों में नियमित योगदानकर्ता है तथा अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय जरनलों में प्रकाशित होते रहे हैं। दस्तावेज में से एंग्लो-फ्रेच प्रतिद्वंद्वता का पता लगाया गया है तथा इसके सामरिक, प्रचालनात्मक और नीतिगत आयामों को छुआ है । औपनिवेशिक प्रतियोगियों की रणनीतियों को आकार देने में समुद्री शक्ति की खासियत तथा परिणाम निर्धारित करने में इसकी निर्णायक भूमिका को भी प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया था।
पहले दिन के ‘चीन की बेल्ट तथा सड़क की पहल’ नाम के दूसरे सत्र की अध्यक्षता कमॉडोर सुशांत डाम, वीएसएम ने की और, ‘एक बेल्ट एक रोड’ विषय पर दस्तावेज़ के साथ रियर एडमिरल धीरेन विग, अतिरिक्त महानिदेशक, प्रोजक्ट सीबर्ड, ने सत्र की शुरूआत की। दस्तावेज में चीन द्वारा शुरू की गयी बेल्ट रोड तथा इसके समुद्री आयामों पर चर्चा की गयी थी।
तक्षशिला संस्थान के सह-संस्थापक तथा निदेशक श्री नितिन पई द्वारा ‘भारत के समुद्री पड़ोस में चीन की सहभागिता का आकलन करना’ पर लिखित एक दस्तावेज ने संकल्पना परिवर्तन तथा अनिश्चितता की संभावनाओं एवं भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को बढावा देने कि लिए क्या करना चाहिए, के बारे में चर्चा की।
भा नौ पो रंजीत के कमान अधिकारी कैप्टेन वीसी मेहरा, ने ‘चीन की समुद्री शक्ति तथा बेल्ट एवं रोड पहल: 21वीं शताब्दी में उपनिवेशीकरण के लिए महानियान ब्लूप्रिंट’ विषय पर अपने दस्तावेज को पेश किया। दस्तावेज मे कुछ तत्वों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला जोकि महन की किताब के अनुसार विकासशील समुद्री शक्ति के लिए तथा जिस तरीके से चीन इसे लागू कर रहा है, आवश्यक है।
सेमीनार के दूसरे दिन समापन दिवस पर चार दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें आईएनए के कैडेट द्वारा ‘गनबोट कूटनीति: भारत-प्रशांत क्षेत्र में उभरते खिलाड़ी और संबद्ध चुनौतियां’, वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान, एवीएसएम एवं बार, वीएसम (सेवानिवृत्त) तथा कमॉडोर जी प्रकाश द्वारा ‘गन बोट कूटनीति’ एवं कमांडर पी रथीस का ‘आईओआर में समुद्री शक्ति’ शामिल है।
दिली सीरीज़ सी पॉवर सेमिनार 2018
केरल राज्य के कन्नूर जिले में एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी (आई एन ए) हमारे देश की प्रमुख सशस्त्र बल संस्थाओं में से एक है। आईएनए के प्रतिष्ठित प्रवेश मार्गों के माध्यम से ही भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होने वाले सभी अधिकारी-प्रशिक्षार्थी अपनी संबंधित सर्विस के ऑफिसर-कोर में शामिल होने के अपने अनुक्रम से होते हुए गुज़रते हैं। अकादमी द्वारा एक समग्र प्रशिक्षण प्रणाली का अनुसरण किया जाता है जो कि प्रत्येक कैडेट के शारीरिक, बौद्धिक व सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में सहायता करती है। प्रशिक्षार्थियों को समुद्र, भूमि, वायु, साथ में ‘बाहरी’ और ‘अंदरूनी’ (साइबर) दोनों में सैन्य नेतृत्व की अनगिनत चुनौतियों के लिए तैयार करते समय, आई एन ए सक्रिय रूप से अकादमिक व व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देती है।
आई एन ए के परिसर के भीतर स्थित ऐतिहासिक पहाड़ दिली के नाम पर, दिली सीरीज़ सेमिनार का आयोजन प्रति वर्ष शरद सत्र के दौरान किया जाता है, जिसका उद्देश्य युवा प्रशिक्षार्थियों को जोशपूर्ण समुद्री इतिहास से अवगत कराना और उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करना होता है जो कि उन्हें आगे खोज करने में प्रेरित करेगा। हालाँकि, समुद्री इतिहास से संबंधित विभिन्न विषयों के ऊपर इस सेमिनार के चार संस्करणों का आयोजन करने के बाद, राष्ट्र के लिए समुद्री ताकत के महत्व पर भविष्य के नौसेना अधिकारी बनने जा रहे कैडेट्स को पर्याप्त जानकारी देने की आवश्यकता को महसूस किया गया। स्थिति की इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, सेमिनार का नाम बदल कर ‘समुद्री ताकत का महत्त्व’ विषय के अंतर्गत ‘डिली सीरीज़ सी पॉवर सेमिनार’ कर दिया गया है।
11-12 अक्तूबर 2018 को आई एन ए में आयोजित किए जाने वाले सेमिनार के पांचवे संस्करण का विषय ‘समुद्री ताकत का भौगोलिक प्रभाव’ है। निम्नलिखित उप-विषयों के ऊपर सेवारत के साथ-साथ सेवानिवृत्त अधिकारियों, शिक्षकों, कैडेट्स से शोध-पत्र आमंत्रित किए गए हैं।
क. समुद्री ताकत व औपनिवेशीकरण
ख़. चीन की बेल्ट और रोड़ पहल
ग. गनबोट कूटनीति – बलप्रयोग के लिए समुद्री ताकत
अधिक जानकारी के लिए लिंक https://www.ina.gov.in/?q=Dilli पर विज़िट करें






