भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन 2025 का दूसरा संस्करण भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन 2025 का दूसरा संस्करण 22 अक्टूबर 2025 को नौसेना प्रमुख के उद्घाटन संबोधन के साथ आरंभ हुआ। नौसेना प्रमुख ने टीम नौसेना के सामूहिक समर्पण, व्यावसायिक दक्षता और परिचालन उत्कृष्टता व युद्ध तैयारी के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में स्पष्ट रूप से दिखाई दी और राष्ट्र के लिए गर्व का विषय बनी। मौजूदा भू-रणनीतिक परिवेश पर प्रकाश डालते हुए, नौसेना प्रमुख ने बेहतर तैयारी, अनुकूलन क्षमता और क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की भूमिका पर बल दिया। युद्ध-तैयार बल के रूप में भारतीय नौसेना की स्थिति दोहराते हुए उन्होंने कई सफल परिचालन तैनातियों और संयुक्त अभियानों के सुचारू संचालन की सराहना की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल की क्षमता वृद्धि और नई खरीदों ने नौसेना की परिचालन क्षमता को और सुदृढ़ किया है। हिंद महासागर क्षेत्र में विश्वसनीय शक्ति और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में नौसेना प्रमुख ने आईओएस सागर की तैनाती और एआईकेईवाईएमई के आयोजन जैसी पहलों को रेखांकित किया, जो महासागर दृष्टि के अनुरूप हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एकजुट बल के रूप में भारतीय नौसेना ने कार्यबल भर्ती, आवास सुधार, शारीरिक फिटनेस और कर्मियों के समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। उन्होंने प्रौद्योगिकी अपनाने, आई.डी.ई.एक्स. पहलों की सफलता और 2047 तक पूर्ण आत्मनिर्भर नौसेना बनाने के सतत प्रयासों को भविष्य तैयार नौसेना की दिशा में सशक्त कदम बताया। नौसेना प्रमुख ने सात प्रमुख क्षेत्रों - युद्ध दक्षता और युद्धक क्षमता, बल स्तर व क्षमता विकास, बेड़ा रखरखाव व परिचालन लॉजिस्टिक्स, नई प्रौद्योगिकियों के नवाचार और एकीकरण, संतुलित कार्यबल विकास, परिचालन व संगठनात्मक चुस्ती तथा राष्ट्रीय एजेंसियों और हितधारकों के साथ समन्वय - पर विशेष फोकस दोहराया। उन्होंने इन प्राथमिक क्षेत्रों में गति बनाए रखने के लिए दिशा–निर्देश दिए ताकि भारतीय नौसेना की सामरिक क्षमता और तैयारियों को और सुदृढ़ किया जा सके तथा देश के समुद्री हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।