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हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद के सातवें संस्करण का आरंभ

 हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद के सातवें संस्करण का आरंभ
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 हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद के सातवें संस्करण का आरंभ
 हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद के सातवें संस्करण का आरंभ

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2025 (आई.पी.आर.डी. 2025) का आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में उद्घाटन हुआ। ‘समग्र समुद्री सुरक्षा और विकास को बढ़ावा: क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और सामर्थ्य वृद्धि’ विषय पर केंद्रित यह आई.पी.आर.डी. 2025 भारतीय नौसेना की शीर्ष स्तर की अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक पहल का सातवां लगातार संस्करण है जो हिंद-प्रशांत और उसके बाहर से नेताओं, नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, राजनयिकों, विद्वानों तथा समुद्री जानकारों को एकजुट कर मुख्य रूप से समुद्री हिंद-प्रशांत के विशाल क्षेत्र में उभरते महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मंच उपलब्ध कराता है। समारोह पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के उद्घाटन संबोधन से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के प्रभावों, गैर-राज्य कारकों के उदय तथा गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों की बढ़ती तीव्रता से समुद्री क्षेत्र में व्याप्त रणनीतिक अस्थिरता का जिक्र किया। उन्होंने इन समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए सहकारी समुद्री ढांचे की जरूरत पर जोर दिया। उसके बाद बांग्लादेश, जापान, इंडोनेशिया, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका के पांच प्रमुख वक्ताओं के साथ एक रोचक सत्र चला जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन के सुरक्षा प्रभावों से निपटने के लिए सहकारी क्षमता निर्माण और सामर्थ्य वृद्धि पर अपने नजरिए पेश किए। इस सत्र से निकली मुख्य बात थी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का संयुक्त मूल्यांकन करना और उसके असर को कम करने के लिए एक व्यापक क्षेत्रीय कार्य योजना बनाना।

पहले दिन का मुख्य आकर्षण नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी का स्मृति व्याख्यान रहा, जिसमें उन्होंने महासागरीय क्षेत्रों खासकर हिंद-प्रशांत के भारत की आर्थिक उन्नति और सुरक्षा के लिए महत्व पर बल दिया। भारत की महासागर समुद्री नीति जो क्षेत्र के सभी के लिए समृद्धि और सुरक्षा की कल्पना करती है उसका जिक्र करते हुए नौसेना प्रमुख ने सहयोग और साझेदारी को इस लक्ष्य हासिल करने का प्रमुख माध्यम बताया। नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर भारतीय नौसेना के कैप्टन के.एस. विक्रमादित्य द्वारा लिखित तथा नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एन.एम.एफ.) द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘फ्यूचर मैरीटाइम वॉरफेयर’ का विमोचन भी किया। विशेष रूप से गढ़े गए सत्र चौपाल की चर्चा में एन.एम.एफ. के महानिदेशक वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान, भारत में जर्मन राजदूत महामहिम डॉ. फिलिप एकरमैन, बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) के महासचिव महामहिम श्री इंद्र मणि पांडेय, फ्रांसीसी नौसेना की वाइस एडमिरल ऐन कुल्लेयर तथा नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के रक्षा सलाहकार कैप्टन जॉर्डी क्लाइन के बीच जीवंत और गहन बातचीत हुई। इस उत्साहपूर्ण चर्चा ने विभिन्न दृष्टिकोणों को उजागर कर महासागर में निहित पारस्परिक एवं समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

पहले दिन की कार्रवाई कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ.) क्रिश्चियन ब्युगेर के विशेष संबोधन के साथ समाप्त हुई। डॉ. ब्युगेर ने एन.एम.एफ. की प्रमुख पत्रिका मैरीटाइम अफेयर्स के विशेष संस्करण का विमोचन भी किया। उच्च स्तरीय नेताओं और प्रसिद्ध विशेषज्ञों के समूह को एकत्र कर – जिसमें 19 देशों के 40 प्रमुख वक्ता शामिल हैं – आई.पी.आर.डी. 2025 का आयोजन भारतीय नौसेना द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें एन.एम.एफ. ज्ञान साझेदार के रूप में जुड़ा है।