भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास स्लाइनेक्स-25 का 12वां संस्करण 18 अगस्त 2025 को कोलंबो में सफलतापूर्वक समाप्त हुआ, जिसने साझा प्रतिबद्धता और समुद्री सुरक्षा को पुनः पुष्ट किया। इस संस्करण में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के पोत भा.नौ.पो. ज्योति और भा.नौ.पो. राणा तथा श्रीलंकाई नौसेना के पोत एस.एल.एन.एस. सायुरा और एस.एल.एन.एस. विजयबाहु (दोनों उन्नत अपतटीय गश्ती पोत) ने भाग लिया।
कोलंबो पोर्ट पर पहुंचने पर, भा.नौ.पो. ज्योति और भा.नौ.पो. राणा के कमांडिंग ऑफिसरों ने पश्चिमी नौसेना क्षेत्र (डब्ल्यू.एन.ए.) के कमांडर, रियर एडमिरल चंदिमा सिल्वा आर.एस.पी., यू.एस.पी. से मुलाकात की और द्विपक्षीय नौसेना सहयोग को बढ़ाने तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय शांति सेना (आई.पी.के.एफ.) स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसमें 1987 से 1990 के बीच श्रीलंका में शांति स्थापना कार्यों के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को सम्मानित किया गया। पोतों को श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों, सरकारी अधिकारियों, छात्रों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों सहित आगंतुकों के लिए खोला गया। इस पहल ने भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं, तकनीकी प्रगति और समृद्ध नौसेना परंपराओं को प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। इसके अतिरिक्त, इस पहल ने आपसी समझ को गहरा करने, समुद्री कूटनीति को बढ़ावा देने और भारत एवं श्रीलंका के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया।
यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया: कोलंबो में 14 से 16 अगस्त 2025 तक हार्बर चरण और 17 से 18 अगस्त 2025 तक समुद्री चरण। हार्बर चरण के दौरान आयोजित गतिविधियों में पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, अग्निशमन, क्षति नियंत्रण, उड्डयन संचालन और मानवीय सहायता व आपदा राहत (एच.ए.डी.आर.) पर पारस्परिक प्रशिक्षण, मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं और प्री-सेल सम्मेलन शामिल थे। समुद्री चरण में संयुक्त अभ्यास, तोपखाने की गोलीबारी, संचार प्रोटोकॉल, नौवहन, नाविकता विकास, विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजुर (वी.बी.एस.एस.) और ईंधन भरने सहित उन्नत नौसेना अभ्यासों का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन हुआ। इन सावधानीपूर्वक नियोजित कार्यों ने अंतरसंचालनीयता को काफी हद तक बढ़ाया, सामरिक क्षमताओं को सुदृढ़ किया और समुद्री सुरक्षा व स्थिरता सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। श्रीलंका में भारतीय नौसेना पोतों की तैनाती ने भारत-श्रीलंका समुद्री साझेदारी में एक और अध्याय जोड़ा, जो क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (एस.ए.जी.ए.आर.) के दृष्टिकोण के अनुरूप स्थिरता और सुरक्षा में योगदान देता है।